राज्य स्थापना दिवस: 12 वर्षों में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम का बदला स्वरूप, विकास और पहचान की नई कहानी
20 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम राज्य स्थापना दिवस मना रहे हैं। 12 वर्षों में दोनों राज्यों ने आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी, सतत विकास और सामाजिक सशक्तिकरण में उल्लेखनीय प्रगति की।
हर वर्ष 20 फरवरी को पूर्वोत्तर भारत के दो प्रमुख राज्य—अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम—अपना राज्य स्थापना दिवस मनाते हैं। पिछले 12 वर्षों में दोनों राज्यों ने विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखे हैं।
अरुणाचल प्रदेश, जो कभी दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण पिछड़ा माना जाता था, अब आधारभूत संरचना क्रांति का प्रतीक बन चुका है। तवांग क्षेत्र को हर मौसम में जोड़ने वाली सेला सुरंग इस परिवर्तन का प्रमुख उदाहरण है। ईटानगर में डोनी पोलो हवाईअड्डे के शुरू होने से राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। इसके अलावा सुबनसिरी लोअर परियोजना जैसे जलविद्युत प्रोजेक्ट राज्य को “भारत का पावर हाउस” बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में भी बदलाव आया है। झूम खेती से आगे बढ़ते हुए अरुणाचल अब कीवी का देश में सबसे बड़ा उत्पादक और बड़ी इलायची का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। 2015-16 से राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 166 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
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वहीं, मिजोरम ने 1986 शांति समझौते के बाद स्थिरता को आधार बनाकर आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। 2012 से 2022 के बीच राज्य की औसत वार्षिक जीएसडीपी वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत रही। कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग-54 व 150 के विस्तार से मिजोरम दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार बन रहा है। डिजिटल कनेक्टिविटी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य अग्रणी है।
दोनों राज्यों में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार हुआ है। अरुणाचल में नए जिलों का गठन प्रशासन को मजबूत कर रहा है, जबकि मिजोरम शिक्षा और सामाजिक सामंजस्य में उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।