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अशोक गहलोत का विपक्षी एकता पर जोर, कहा—कांग्रेस में लौटें क्षेत्रीय दल, लोकतंत्र खतरे में

अशोक गहलोत ने क्षेत्रीय दलों से कांग्रेस में लौटने और राहुल गांधी को नेता स्वीकार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है और विपक्षी एकता जरूरी है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्रीय दल कभी कांग्रेस से अलग हुए थे, उन्हें वापस कांग्रेस में शामिल होना चाहिए और पूरे दिल से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना चाहिए।

अशोक गहलोत ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो देशभर में मतदान का पैटर्न बदल सकता है और विपक्षी राजनीति को नई दिशा मिलेगी। 

गहलोत ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत के उस सुझाव का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस से अलग हुए दलों को फिर से एक साथ आना चाहिए। संजय राउत ने विशेष रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार से इस एकीकरण की पहल करने की अपील की थी।

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अशोक गहलोत ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि वर्तमान में लोकतंत्र “गंभीर खतरे” में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष को मजबूत और एकजुट होना समय की मांग है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सभी क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ फिर से जुड़ते हैं तो इससे विपक्षी वोटों का बिखराव कम होगा और सरकार के खिलाफ एक मजबूत विकल्प तैयार हो सकता है।

गहलोत के इस बयान को 2026 के राजनीतिक माहौल में विपक्षी रणनीति को एकजुट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक किसी भी क्षेत्रीय दल ने इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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