मायावती के बयान के बाद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से लिया संन्यास, आकाश आनंद के भविष्य पर बढ़ा फोकस
अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के बयान के बाद राजनीति से संन्यास की घोषणा की। मायावती ने इसे आकाश आनंद और बसपा के भविष्य से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से निष्कासित नेता और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार को राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक और सामाजिक जीवन से खुद को अलग कर रहे हैं।
अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि वह अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिंदगी से संन्यास ले रहे हैं और उनका जीवन अपनी ‘बहन’ के प्रति ऋणी है। उन्होंने मायावती के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्हें उनके लिए अपना जीवन समर्पित करने पर गर्व है।
अशोक सिद्धार्थ को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते 2 अगस्त को दूसरी बार बसपा से निष्कासित किया गया था। उनका यह फैसला मायावती के उस बयान के कुछ घंटे बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छोड़कर व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठें, तो इससे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को मदद मिल सकती है।
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मायावती ने कहा था कि उनके भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में सक्रिय भूमिका तभी संभव है, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास लें। मायावती ने सिद्धार्थ पर बार-बार निजी और पारिवारिक हितों तथा महत्वाकांक्षाओं को बसपा के मिशन से अधिक महत्व देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने सिद्धार्थ को कई बार अपनी गलतियां सुधारने का अवसर दिया, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी। मायावती के अनुसार, इसका असर अशोक सिद्धार्थ के साथ उनके दामाद आकाश आनंद पर भी पड़ा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मायावती ने 3 सितंबर को लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान आकाश आनंद को बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया था। मायावती पहले भी कह चुकी हैं कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से अधिक परिपक्व होने की जरूरत है और फिलहाल उन्हें बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि यह फैसला पहले लिया गया होता, तो बसपा, बहुजन समाज और आंबेडकरवादी बहुजन आंदोलन के साथ आकाश आनंद को भी लगातार प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
मायावती ने कहा कि यदि सिद्धार्थ को आकाश आनंद के उज्ज्वल भविष्य और पार्टी के व्यापक हितों की थोड़ी भी चिंता होती, तो वह पहले ही राजनीति से संन्यास की घोषणा कर देते। उन्होंने दावा किया कि देर से लिया गया यह फैसला उनके राजनीतिक इरादों और महत्वाकांक्षाओं को लेकर सवाल खड़े करता है।