×
 

आयु आधारित सोशल मीडिया प्रतिबंधों की वकालत, अश्विनी वैष्णव ने डीपफेक कानूनों को सख्त करने की आवश्यकता जताई

अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर आयु आधारित प्रतिबंध लगाने और 'डीपफेक' से जुड़ी सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता की बात की। भारत इस दिशा में कदम उठा सकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर आयु आधारित प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है और इस मामले पर कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से बातचीत जारी है। उन्होंने ‘डीपफेक’ की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों की जरूरत है।

वैष्णव ने कहा कि 'डीपफेक' के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार इस पर कड़ी निगरानी और प्रभावी नियमन की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी सोशल मीडिया कंपनी को, चाहे वह नेटफ्लिक्स हो, यूट्यूब हो, मेटा हो, या एक्स, भारत के संविधान और कानूनी ढांचे का पालन करना होगा।

उन्होंने कहा, "हम अब इस मुद्दे पर सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं, कि आयु आधारित प्रतिबंध और डीपफेक के खिलाफ क्या कदम उठाए जा सकते हैं। हमें इस पर मजबूत नियमन की आवश्यकता है क्योंकि यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है।"

और पढ़ें: अमेरिका ने 50 फाइटर जेट्स और एक दूसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मध्य-पूर्व भेजा, जेराल्ड आर. फोर्ड पहुंचा क्षेत्र की ओर

आगे उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में सहमति बनाने के प्रयास किए जाएंगे, क्योंकि संसद की समिति ने पहले ही 'डीपफेक' की समस्या का गहन अध्ययन किया है।

अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत सरकार अब सोशल मीडिया पर आयु आधारित नियमों को लागू करने पर विचार कर रही है, जैसा कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम ने किया है। भारत के आर्थिक सर्वेक्षण में भी बच्चों में बढ़ते डिजिटल एडिक्शन और अत्यधिक स्क्रीन समय को देखते हुए इस दिशा में कदम उठाने की सिफारिश की गई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि ऑनलाइन प्लेटफार्मों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए कि वे उपयोगकर्ताओं की उम्र की सही पहचान करें।

और पढ़ें: राफेल सौदे में 50 प्रतिशत मेड इन इंडिया घटक; भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नया मोड़

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share