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ASRAAM मिसाइल से और घातक बनेंगे भारतीय वायुसेना के मिग-29 लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना मिग-29 में ASRAAM मिसाइल शामिल कर रही है, जिससे उसकी मारक क्षमता, रेंज और हवाई युद्ध में बढ़त मिलेगी तथा पुराने आर-73 मिसाइलों की जगह लेगी।

भारतीय वायुसेना अपने मिग-29 लड़ाकू विमानों को और अधिक आधुनिक और घातक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वायुसेना मिग-29 के यूपीजी (अपग्रेडेड) संस्करण में एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (एएसआरएएएम) को शामिल करने की योजना बना रही है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं, ताकि इन मिसाइलों का एकीकरण और परीक्षण किया जा सके।

ASRAAM एक चौथी पीढ़ी की शॉर्ट रेंज, हीट-सीकिंग एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे यूरोप की कंपनी एमबीडीए ने विकसित किया है। यह "फायर एंड फॉरगेट" तकनीक पर आधारित है, यानी लॉन्च के बाद यह खुद ही लक्ष्य का पीछा कर उसे नष्ट कर सकती है। इसकी मारक क्षमता 25 किलोमीटर से अधिक है और इसकी गति मैक 3 से ज्यादा है।

यह मिसाइल पहले से ही तेजस और जगुआर जैसे भारतीय विमानों में इस्तेमाल की जा रही है। भारतीय वायुसेना अब पुराने सोवियत दौर की आर-73 मिसाइलों को हटाकर ASRAAM को अपनाना चाहती है, जिनकी रेंज केवल 10 से 15 किलोमीटर तक सीमित है।

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साल 2021 में भारत की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और एमबीडीए के बीच इस मिसाइल के स्थानीय निर्माण और परीक्षण के लिए समझौता हुआ था। इसका उत्पादन तेलंगाना के हैदराबाद स्थित संयंत्र में किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ASRAAM की ताकतवर रॉकेट मोटर इसे चीन की पीएल-10 मिसाइलों के मुकाबले बढ़त दे सकती है। इससे हवाई युद्ध के दौरान अधिक गति और दूरी का फायदा मिलेगा।

भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 55 से अधिक मिग-29 विमान हैं, जिन्हें पहली बार 1987 में शामिल किया गया था। यह विमान हवा से हवा और जमीन पर हमले करने में सक्षम है और दुश्मन के विमानों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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