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असम में पीएम मोदी ने ब्रह्मपुत्र सेतु और पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री मोदी ने असम में ब्रह्मपुत्र पर कुमार भास्कर वर्मा सेतु और पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन किया, जिससे कनेक्टिविटी और रक्षा क्षमता मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ और डिब्रूगढ़ जिले में पूर्वोत्तर भारत की पहली राष्ट्रीय राजमार्ग इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ELF) शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 5,450 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्च शिक्षा और शहरी परिवहन को मजबूती देना है।

ब्रह्मपुत्र पर बना आधुनिक सेतु

करीब 2.86 किलोमीटर लंबा, छह लेन वाला ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) पुल है। यह पुल गुवाहाटी को नॉर्थ गुवाहाटी से जोड़ता है और इसके शुरू होने से दोनों ओर के बीच यात्रा समय घटकर मात्र सात मिनट रह जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना गुवाहाटी और आसपास के क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे कनेक्टिविटी, व्यापार और आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही कामाख्या मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।

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भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पुल में बेस आइसोलेशन तकनीक और फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त, उच्च गुणवत्ता वाले स्टे केबल और ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) लगाया गया है, जिससे संरचना की वास्तविक समय में निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उद्घाटन समारोह में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाऔर केंद्रीय मंत्री

सरबानंदा सोनोवाल भी उपस्थित रहे।

पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा

प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ जिले के मोरन बाईपास पर 4.2 किलोमीटर लंबी विशेष रूप से सुदृढ़ की गई सड़क पर इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा भारतीय वायु सेना के सहयोग से तैयार की गई है और सैन्य व नागरिक विमानों के लिए आपात स्थिति में उपयोगी होगी।

इस मौके पर सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों ने रनवे के रूप में उपयोग किए गए राजमार्ग पर सफल टेक-ऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया। यह सुविधा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, विशेषकर भारत-चीन सीमा के निकट स्थित होने के कारण।

यह परियोजना आपदा प्रबंधन और रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देगी, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया और आपातकालीन सेवाओं की क्षमता बढ़ेगी।

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