असम में मानसून की पहली बाढ़ का कहर, 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, रेल सेवाएं ठप
असम में मानसून की पहली बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होने से ट्रेन सेवाएं बंद हैं और सरकार राहत कार्य तेज कर रही है।
मानसून की पहली बाढ़ ने असम में भारी तबाही मचानी शुरू कर दी है। लगातार हो रही बारिश और पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में तेज वर्षा के कारण राज्य के छह जिलों में 22 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बढ़ते जलस्तर ने गांवों और कृषि भूमि को जलमग्न कर दिया है, जबकि एक रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रमुख रेल मार्ग पर ट्रेन सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित कर दी गई हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार जिलों के कुल 22,124 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित धेमाजी जिला है, जहां 15,483 लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने बताया कि भारी बारिश और नदी किनारे कटाव के कारण आर्चीपाथर और सिमेन चापरी स्टेशनों के बीच स्थित रेलवे पुल का एक पिलर अस्थिर हो गया है। इसके चलते इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि किसी ट्रेन को नुकसान नहीं पहुंचा और कोई यात्री घायल नहीं हुआ। यात्रियों की सुविधा के लिए मुरकोंगसेलेक और सिलापाथर के बीच बस सेवा शुरू की गई है तथा विभिन्न स्टेशनों पर सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं।
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बाढ़ के कारण 96 गांव जलमग्न हो गए हैं और लगभग 1,690 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 48,199 से अधिक पशुधन भी प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश के चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शिवसागर जिले के नांगलामुराघाट में दिसांग नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे बाढ़ और गंभीर होने की आशंका बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।