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असम में महावतों को ऑस्ट्रेलिया से मिला हाथियों को मानवीय तरीके से संभालने का प्रशिक्षण

असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में महावतों को ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों से हाथियों को बिना दर्द दिए प्रशिक्षित करने की नई तकनीकें सिखाई जा रही हैं, जिससे हाथियों के कल्याण और सुरक्षा में सुधार होगा।

असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में महावतों को हाथियों को मानवीय और बिना दर्द दिए प्रशिक्षित करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों से विशेष प्रशिक्षण मिल रहा है। यह पहल एशिया के सात देशों में चल रहे एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें लगभग 5,000 पालतू हाथियों के साथ काम करने वाले महावत शामिल हैं।

पूर्वोत्तर भारत इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला पड़ाव बना है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक तरीकों में बदलाव लाते हुए ऐसे मानवीय तरीके अपनाना है, जिनसे हाथियों पर शारीरिक या मानसिक दबाव कम हो और उनके व्यवहार को सकारात्मक तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

इस प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ महावतों को सिखा रहे हैं कि हाथियों को आदेश मानने के लिए दर्द या सजा का सहारा लेने के बजाय सकारात्मक प्रोत्साहन और भरोसे पर आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। इसमें इनाम आधारित प्रशिक्षण, व्यवहारिक संकेतों को समझना और हाथियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना शामिल है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से पारंपरिक तरीकों में अक्सर कठोरता शामिल रही है, जिससे हाथियों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नई तकनीकें न केवल हाथियों के कल्याण को बेहतर बनाएंगी बल्कि महावतों की सुरक्षा और कार्यक्षमता भी बढ़ाएंगी।

यह पहल वन्यजीव संरक्षण के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें कैद में रहने वाले हाथियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना प्राथमिक लक्ष्य है। मानस राष्ट्रीय उद्यान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह के प्रशिक्षण से मानव और वन्यजीव के बीच संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे भारत के अन्य राज्यों और एशिया के अन्य देशों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे हाथियों के संरक्षण और देखभाल में सकारात्मक बदलाव आएगा।

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