मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए जंगलों की सुरक्षा जरूरी: असम मंत्री जयंता मल्लबरुआ
असम के वन मंत्री जयंता मल्लबरुआ ने गोलपाड़ा जिले के जंगलों का दौरा कर अतिक्रमण की समीक्षा की और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन संरक्षण पर जोर दिया।
असम के वन मंत्री जयंता मल्लबरुआ ने सोमवार को कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी संरक्षित रहेगा और इंसानों के साथ टकराव की घटनाओं में कमी आएगी।
वन मंत्री ने असम के गोलपाड़ा जिले में स्थित थरकोनलबाड़ी प्रस्तावित आरक्षित वन (पीआरएफ) और रख्यासिनी पहाड़ प्रस्तावित आरक्षित वन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वन भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायतों का जायजा लिया और वन संरक्षण को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की।
जयंता मल्लबरुआ ने अधिकारियों से जंगलों की निगरानी बढ़ाने और वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि असम में वन क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहां कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनके संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों को बचाना आवश्यक है।
मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक कर वन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, गश्त बढ़ाने और स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण के प्रयासों में स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
गौरतलब है कि असम के कई इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जंगलों में अतिक्रमण, प्राकृतिक आवासों का नुकसान और वन क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों के बढ़ने से हाथियों और अन्य वन्यजीवों के साथ संघर्ष की स्थिति पैदा होती है।
वन मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि जंगलों की रक्षा करना केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित आरक्षित वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और किसी भी तरह के अवैध कब्जे को रोकने के लिए नियमित निगरानी की जाए।
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