मध्य प्रदेश में पूर्वोत्तर पहचान को लेकर असम के छात्र पर हमला, विश्वविद्यालय परिसर में बवाल
मध्य प्रदेश के IGNTU हॉस्टल में असम के छात्र पर पूर्वोत्तर पहचान को लेकर हमला हुआ, गंभीर चोटें आईं, पांच छात्र निष्कासित, एफआईआर दर्ज, जांच जारी।
मध्य प्रदेश स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) के हॉस्टल में असम के एक छात्र पर उसकी क्षेत्रीय पहचान को लेकर कथित रूप से बेरहमी से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र, हिरोज ज्योति दास, असम के रहने वाले हैं और विश्वविद्यालय में एमए अर्थशास्त्र के प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने उनसे नाम और राज्य पूछने के बाद केवल पूर्वोत्तर से होने के कारण उन पर जानलेवा हमला किया और जान से मारने की धमकी भी दी।
पीड़ित के अनुसार, यह घटना 13 जनवरी की तड़के करीब 4 बजे की है, जब वह गुरु गोबिंद बॉयज़ हॉस्टल में अपने कमरे से शौचालय जाने के लिए बाहर निकले थे। इसी दौरान छह से सात छात्र, जो कथित रूप से नशे में थे, ने उन्हें रोक लिया और पूछताछ शुरू कर दी। जैसे ही दास ने बताया कि वह असम से हैं, आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। बाद में उन्होंने बताया कि हमलावरों ने मारपीट के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
घायल छात्र को पहले विश्वविद्यालय की डिस्पेंसरी में प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अस्पताल रेफर किया गया। मेडिकल रिपोर्ट में नाक की हड्डी में फ्रैक्चर, आंखों में खून जमना और चेहरे व शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
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घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में भारी आक्रोश फैल गया। 14 जनवरी को छात्रों और एनसीसी कैडेट्स ने प्रशासनिक भवन का घेराव कर कई घंटों तक नारेबाजी की। प्रशासन से संतोषजनक कार्रवाई का आश्वासन न मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने रजिस्ट्रार कार्यालय का भी घेराव किया। हालात बिगड़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू करते हुए पांच छात्रों—अनुराग पांडे, जतिन सिंह, रंजीत त्रिपाठी, विशाल यादव और उत्कर्ष सिंह—को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया और जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी।
छात्रों का कहना है कि यह घटना कैंपस में सुरक्षा में गंभीर चूक और भेदभाव को उजागर करती है। अमरकंटक थाने में पीड़ित की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और दोषियों व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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