अयोध्या मिसाल और 2000-पृष्ठ एएसआई रिपोर्ट: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का भोझशाला निर्णय
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोझशाला को मंदिर घोषित किया। एएसआई की 2000-पृष्ठ रिपोर्ट और अयोध्या फैसले को ध्यान में रखते हुए हिन्दू पक्ष को पूजा का अधिकार मिला।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को लंबे समय से चल रहे भोझशाला विवाद में हिन्दू याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इस स्थल को मंदिर घोषित कर दिया। न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और अलोक अवस्थी ने धार जिले के भोझशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े पांच याचिकाओं और एक रिट याचिका पर कई हफ्तों की सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया।
फैसले के दौरान न्यायालय ने सभी पक्षों के तर्क सुने और ऐतिहासिक अभिलेख, कानूनी प्रावधान तथा स्थल से जुड़े हजारों पृष्ठों के दस्तावेजों की समीक्षा की। विवादित स्थल पर हिन्दू, मुस्लिम और जैन समुदायों के अलग-अलग पूजा अधिकारों के दावे थे।
इस मामले का मुख्य हिस्सा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़ा था। एएसआई की 2000-पृष्ठ से अधिक की रिपोर्ट में कहा गया कि मस्जिद से पहले स्थल पर परमार काल का एक बड़ा निर्माण था और वर्तमान संरचना के कई हिस्से पुराने मंदिर की सामग्री का उपयोग कर बनाए गए थे।
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मुख्य न्यायालय टिप्पणियाँ
- अदालत ने 2003 का एएसआई आदेश रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को भोझशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।
- न्यायालय ने कहा कि विवादित संरचना की धार्मिक पहचान मंदिर के अनुरूप है।
- एएसआई सर्वेक्षण और ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर भोझशाला में संस्कृत शिक्षा केंद्र और देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर के संकेत मिले।
- मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार से वैकल्पिक स्थल का अनुरोध करने की स्वतंत्रता होगी।
- अदालत ने कहा कि उसके निष्कर्ष एएसआई के पुरातात्विक प्रमाण, ऐतिहासिक संदर्भ और सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले से प्राप्त कानूनी सिद्धांतों पर आधारित हैं।
- केंद्र सरकार और एएसआई को मंदिर परिसर के भविष्य के प्रशासन और प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
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