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लखनऊ में आयुष इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 25 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग

लखनऊ में आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

लखनऊ में बुधवार को बड़ी संख्या में आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास जुटे डॉक्टरों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने अपना मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग की है।

प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मेहनत और प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, ऐसे में 25 हजार रुपये का स्टाइपेंड उनकी जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार फैसला नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन को देखते हुए हजरतगंज में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

2011 से नहीं बढ़ा स्टाइपेंड

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से आयुष इंटर्न का स्टाइपेंड नहीं बढ़ाया गया है। वर्तमान में उन्हें केवल 7,500 रुपये प्रति माह मिलते हैं। उनका दावा है कि इसी अवधि में उनके साथ पढ़ने वाले एमबीबीएस और बीडीएस डॉक्टरों के स्टाइपेंड में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। इससे आयुष छात्रों के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा हो रही है।

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तेज गर्मी के बावजूद डॉक्टर गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन करते रहे। कुछ प्रदर्शनकारी छाता लेकर बैठे दिखाई दिए, जबकि कई ने पोस्टर और बैनर से अपना सिर ढक रखा था।

डॉक्टरों ने कहा कि मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौरान उन्हें अस्पतालों और संस्थानों में नियमित रूप से सेवाएं देनी पड़ती हैं। मरीजों की देखभाल और अस्पताल से जुड़ी जिम्मेदारियों के बीच 7,500 रुपये में आवास, भोजन, यात्रा और पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। घर से दूर इंटर्नशिप करने वाले छात्रों के लिए आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।

उन्होंने सरकार से मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आयुष इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की, ताकि वे बिना आर्थिक चिंता के प्रशिक्षण और मरीजों की सेवा पर ध्यान दे सकें।

प्रदर्शनकारियों ने आयुष चिकित्सा प्रणाली को मजबूत करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी देश की पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं और राज्य में इन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

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