व्याकरण के सहारे मातृत्व: बच्ची अरिहा से बात करने के लिए मां ने सीखी जर्मन, मोदी ने मर्ज़ से उठाया मामला
जर्मनी में फोस्टर केयर में रह रही भारतीय बच्ची अरिहा से संवाद के लिए उसकी मां धारा शाह ने जर्मन सीखी। पांच साल से जारी अलगाव का मुद्दा प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन नेतृत्व के समक्ष उठाया।
धारा शाह के लिए मातृत्व का अर्थ अब सिर्फ ममता नहीं, बल्कि शब्दावली की रिहर्सल, व्याकरण के अभ्यास और महीने में केवल दो बार, वह भी निगरानी में, अपनी चार साल से अधिक उम्र की बेटी से मुलाकात तक सीमित हो गया है। उनकी बेटी अरिहा, जो एक भारतीय नागरिक है, शैशवावस्था से ही जर्मनी में फोस्टर केयर में रह रही है। माता-पिता पर लगे दुर्व्यवहार के आरोप खारिज हो जाने के बावजूद यह अलगाव अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
गुजरात में जन्मी धारा शाह बीते करीब तीन वर्षों से जर्मन भाषा सीख रही हैं, ताकि वह अपनी बेटी से संवाद कर सकें। अरिहा केवल जर्मन भाषा ही बोलती है, क्योंकि उसका पालन-पोषण जर्मनी के फोस्टर होम में हुआ है। भाषा की यह दूरी मां-बेटी के रिश्ते में एक और चुनौती बन गई है।
धारा शाह अपने पति भवेश शाह के लिए भी एकमात्र दुभाषिया बन गई हैं, क्योंकि भवेश को जर्मन भाषा नहीं आती। अहमदाबाद में रह रहे परिवार के सदस्यों ने बताया कि बेटी से मुलाकात के दौरान, जो बेहद सख्त नियमों और निगरानी में होती है, धारा ही पति-पत्नी और अरिहा के बीच संवाद का माध्यम बनती हैं।
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यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जर्मनी के नेता फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ बातचीत के दौरान बच्ची अरिहा का मुद्दा उठाया। भारत सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि अरिहा को उसके माता-पिता के पास वापस लाया जा सके।
धारा शाह का संघर्ष यह दिखाता है कि एक मां अपनी संतान से जुड़े रहने के लिए किस हद तक जा सकती है—यहां तक कि नई भाषा सीखकर भी। यह कहानी न केवल मातृत्व की दृढ़ता को दर्शाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
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