बांग्लादेश में स्वतंत्र चुनाव के हालात अभी तैयार नहीं: जमात-ए-इस्लामी, सरकारी पक्षपात का आरोप
जमात-ए-इस्लामी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव का माहौल अभी तैयार नहीं है और कुछ सरकारी अधिकारी एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रहे हैं।
बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने कहा है कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जरूरी माहौल अभी तक तैयार नहीं हुआ है। पार्टी ने अंतरिम सरकार के एक वर्ग पर “किसी खास राजनीतिक दल” के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है।
ये टिप्पणियां जमात-ए-इस्लामी की केंद्रीय कार्यकारी परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान की गईं, जो सोमवार (5 जनवरी, 2026) को ढाका में आयोजित हुई। यह बयान ऐसे समय आया है जब 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले बांग्लादेश की राजनीति में तेज बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को देश के कड़े आतंकवाद-रोधी कानून के तहत चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। ऐसे में दिवंगत प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को अगली सरकार बनाने का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। जमात-ए-इस्लामी, जो 2001 से 2006 के दौरान बीएनपी की गठबंधन सहयोगी थी, अब आगामी चुनावों में उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है।
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जमात प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि पार्टी ने आगामी संसदीय चुनाव से जुड़े राजनीतिक माहौल की समीक्षा की। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, बयान में किसी संगठन का नाम लिए बिना कहा गया कि देश के कई इलाकों से शिकायतें मिली हैं कि कुछ सरकारी अधिकारी एक “विशेष राजनीतिक दल” के पक्ष में काम कर रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्याओं पर भी चिंता जताई, जो कई बार दिनदहाड़े की जा रही हैं। जमात का दावा है कि देश में अभी तक स्वतंत्र, निष्पक्ष और तटस्थ चुनाव का वातावरण नहीं बन पाया है।
जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव आयोग और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों से पूरी निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अपील की और सरकार से कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें।
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन की ओर इशारा करते हुए पार्टी ने कहा कि 16 वर्षों के संघर्ष के बाद “तानाशाही” को हटाया गया है और लगभग 1,500 लोगों की जान तथा 30,000 से अधिक लोगों के घायल या स्थायी रूप से अपंग होने की कीमत पर बने “नए बांग्लादेश” को किसी भी साजिश का शिकार नहीं बनने दिया जाना चाहिए।