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नॉर्थ चेन्नई की जंग: आरके नगर में वर्चस्व की लड़ाई, जयललिता की छाया अब भी कायम

तमिलनाडु चुनाव से पहले आरके नगर सीट पर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच कड़ी टक्कर है, जहां जयललिता की विरासत अब भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक चार दिन पहले नॉर्थ चेन्नई की आरके नगर सीट पर राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। घनी आबादी वाले इस शहरी क्षेत्र में डीएमके के उम्मीदवार जे. जॉन एबेनेज़र लगातार दूसरी बार जीत हासिल करने के लिए मैदान में हैं। हालांकि, यह सीट लंबे समय तक एआईएडीएमके का गढ़ मानी जाती रही है और यहां दिवंगत नेता जे. जयललिता की मजबूत पकड़ रही है।

आरके नगर, जिसे डॉ. राधाकृष्णन नगर के नाम से भी जाना जाता है, तमिलनाडु की राजनीति में खास महत्व रखता है। जयललिता के निधन के बाद यहां हुए उपचुनावों ने इस सीट को और अधिक चर्चित बना दिया था। आज भी मतदाताओं के बीच उनकी छवि और प्रभाव महसूस किया जाता है, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

डीएमके इस बार इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि एआईएडीएमके इसे वापस हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। दोनों दलों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है।

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स्थानीय मुद्दों जैसे बुनियादी सुविधाएं, जल निकासी, रोजगार और शहरी विकास इस चुनाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही, मतदाताओं की भावनाओं पर जयललिता की विरासत का असर भी साफ नजर आ रहा है।

चुनाव के नजदीक आते ही प्रचार अभियान तेज हो गया है और सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आरके नगर की यह लड़ाई तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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