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विदेशी पूंजी निकासी और टैरिफ आशंकाओं से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी कमजोर

लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ बढ़ने की आशंका से शेयर बाजार दबाव में रहा, जिससे शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।

शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी देखने को मिली। लगातार विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिका द्वारा संभावित टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर नई चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

शुरुआत में हल्की रिकवरी के बाद 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 78.84 अंक गिरकर 84,102.12 के स्तर पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 21.50 अंक फिसलकर 25,850.85 पर कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से आईसीआईसीआई बैंक, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एनटीपीसी, अडानी पोर्ट्स, सन फार्मा और ट्रेंट सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। दूसरी ओर, इटरनल, एचसीएल टेक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एशियन पेंट्स के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

गुरुवार (8 जनवरी) को भी बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 780.18 अंक या 0.92% लुढ़ककर 84,180.96 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 263.90 अंक या 1.01% गिरकर 25,876.85 पर आ गया था। बीते चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,581.05 अंक या 1.84% गिर चुका है, जबकि निफ्टी में 451.7 अंक या 1.71% की गिरावट आई है।

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एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 3,367.12 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 3,701.17 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर. ने कहा कि वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं और भारत के रूसी तेल आयात से जुड़े संभावित अमेरिकी टैरिफ के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर बना हुआ है। अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में प्रगति न होने से खासकर विदेशी निवेशक सतर्क हैं।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और शंघाई का एसएसई कंपोजिट बढ़त में रहे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक कमजोर रहा। गुरुवार को अमेरिकी बाजार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.53% चढ़कर 62.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

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