दो वर्षों तक केंद्र की मत्स्य योजना लागू नहीं करने पर बंगाल सरकार पर केंद्र का आरोप
केंद्र ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल ने PMMSY योजना दो वर्षों तक लागू नहीं की और स्वीकृत राशि का केवल आंशिक उपयोग किया। योजना का उद्देश्य देश में नीली क्रांति को बढ़ावा देना है।
केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) को दो वर्षों तक लागू नहीं किया और स्वीकृत राशि में से केवल ₹58.51 करोड़ ही खर्च किए। यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मंगलवार (2 दिसंबर 2025) को लोकसभा में दी।
PMMSY योजना को वर्ष 2020-21 में मत्स्य पालन क्षेत्र के पारिस्थितिक रूप से संतुलित, आर्थिक रूप से टिकाऊ और सामाजिक रूप से समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। मंत्री के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद पहले दो वर्षों तक पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के साथ सहयोग नहीं किया। वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने इस योजना को स्वीकार किया और ₹221 करोड़ के प्रस्ताव भेजे, जिनमें से केंद्र सरकार ने ₹114 करोड़ मूल्य के प्रस्तावों को मंजूरी दी।
मंत्री ने कहा कि स्वीकृत राशि में से केवल ₹58.51 करोड़ ही अब तक खर्च किए गए हैं, जिससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार सहयोग नहीं करती, तो किसी भी केंद्रीय योजना को सफलतापूर्वक लागू करना कठिन हो जाता है।
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राजीव रंजन सिंह ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पश्चिम बंगाल का दौरा कर योजना की समीक्षा की, लेकिन बैठक में राज्य सरकार के केवल निम्न स्तर के अधिकारी उपस्थित थे, जिन्हें योजना की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
PMMSY का उद्देश्य भारत में मत्स्य क्षेत्र में ‘नीली क्रांति’ लाना है। यह योजना वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों के लिए लागू की गई है और इसके लिए कुल ₹20,050 करोड़ का निवेश निर्धारित किया गया है। यह देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की जा रही है।
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