पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के दौरान दुराचार पर 7 अधिकारी निलंबित
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित दुराचार पर सात अधिकारी निलंबित। 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी, लगभग 58 लाख नाम हटाने की प्रक्रिया।
भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित गंभीर दुराचार, कर्तव्य में लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
निलंबित अधिकारियों में सैफुर रहमान (56-समसेरगंज, मुर्शिदाबाद), नितीश दास (55-फरक्का), डालिया राय चौधरी (16-मयनागुड़ी), मुर्शिद आलम (57-सूती), सत्यजीत दास (139-कैनिंग पूर्व), जॉयदीप कुंडू (139-कैनिंग पूर्व) और देबाशीष बिस्वास (229-डेबरा) शामिल हैं। ये सभी संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारी (एईआरओ) के रूप में तैनात थे।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि मतदाता सूची में “तार्किक विसंगतियों” से जुड़े मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब 28 फरवरी को अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी। यह सुनवाई 27 दिसंबर से शुरू हुई थी और राज्यभर के स्कूलों, क्लबों तथा सरकारी भवनों में आयोजित शिविरों में संपन्न हुई।
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सुनवाई के दौरान मसौदा सूची में नाम गायब होने, वर्तनी की त्रुटियों और अन्य शिकायतों पर विचार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, 21 फरवरी तक दस्तावेजों की जांच जारी रहेगी और एईआरओ के पास लंबित जानकारी अपलोड की जाएगी।
घर-घर सत्यापन अभियान में करीब 58 लाख नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए। इनमें मृत मतदाता, दोहराव वाले नाम और स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं। अधिकांश चिन्हित व्यक्ति नोटिस मिलने के बावजूद सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।
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