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‘भाव्य’ योजना से बनेंगे निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क, विनिर्माण और रोजगार को मिलेगा नया बल

डीपीआईआईटी सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि भाव्य योजना निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क विकसित करेगी, जिससे विनिर्माण, रोजगार, निर्यात प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक निवेश को देशभर में बढ़ावा मिलेगा।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा है कि भारत औद्योगिक विकास योजना (भाव्य) का उद्देश्य देशभर में ऐसे निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क विकसित करना है, जो तेजी से उद्योगों को आकर्षित करें, रोजगार के अवसर पैदा करें और भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती प्रदान करें।

राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) द्वारा आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि भाव्य योजना की सफलता केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से नहीं आंकी जाएगी। इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये औद्योगिक पार्क कितनी प्रभावी ढंग से निवेशकों को आकर्षित करते हैं और सक्रिय विनिर्माण केंद्रों के रूप में विकसित होते हैं।

उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निवेशक-केंद्रित प्रस्ताव तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों में कारोबार सुगमता, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ और मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रमुखता दी जानी चाहिए, ताकि उद्योग कम समय में अपना संचालन शुरू कर सकें।

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भाटिया ने कहा कि योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का मूल्यांकन उनकी दीर्घकालिक औद्योगिक व्यवहार्यता और निवेश क्षमता के आधार पर किया जाएगा। उनका कहना था कि योजना का लक्ष्य ऐसे औद्योगिक पार्क विकसित करना है जहां तैयार बुनियादी ढांचा तेजी से निवेश, उत्पादन गतिविधियों, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा में परिवर्तित हो सके।

वाणिज्य भवन में आयोजित इस कार्यशाला में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भाव्य योजना के ढांचे के साथ-साथ राष्ट्रीय परीक्षण गृह (एनटीएच) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा उपलब्ध परीक्षण सुविधाओं पर चर्चा की गई।

एनआईसीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने निवेश-तैयार औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, राष्ट्रीय परीक्षण गृह के महानिदेशक डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने ड्रोन प्रमाणन, ईवी बैटरी परीक्षण, एयरोस्पेस उपकरण, सौर ऊर्जा उपकरण और जैविक खाद्य परीक्षण जैसी उन्नत सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनआईसीडीसी के सहयोग से औद्योगिक गलियारों में परीक्षण केंद्र और नमूना संग्रह केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।

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