भुवनेश्वर अदालत ने अवैध प्रवेश के मामले में नौ बांग्लादेशी नागरिकों को दो साल की सजा सुनाई
भुवनेश्वर अदालत ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के दोष में नौ बांग्लादेशी नागरिकों को विदेशी अधिनियम के तहत दो साल की कठोर कैद और जुर्माने की सजा सुनाई।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर की एक अदालत ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में नौ बांग्लादेशी नागरिकों को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है। ये सभी लोग अपने पासपोर्ट, वीज़ा या कोई अन्य वैध यात्रा दस्तावेज पेश करने में असफल रहे।
यह फैसला भुवनेश्वर के उप मंडलीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) की अदालत ने सुनाया। अदालत ने इन नौ बांग्लादेशी नागरिकों को विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत दोषी ठहराया। दोषी ठहराए गए लोग बांग्लादेश के मयमनसिंह, बागेरहाट, प्रिसपुर और ढाका जिलों के निवासी बताए गए हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी बिना किसी वैध दस्तावेज के गुप्त तरीके से भारत में दाखिल हुए थे। जांच के दौरान ये तथ्य सामने आए कि आरोपियों के पास न तो पासपोर्ट था और न ही वैध वीज़ा। इसके अलावा, पूछताछ के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे चोरी-छिपे तरीके से सीमा पार कर भारत आए थे।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी विदेशी नागरिक का बिना वैध अनुमति और दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करना कानूनन अपराध है और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा व कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया और कठोर कारावास की सजा सुनाई।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला अवैध घुसपैठ के मामलों में एक कड़ा संदेश देता है और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक हो सकता है। सजा पूरी होने के बाद आरोपियों को उनके देश वापस भेजे जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है, जैसा कि प्रचलित कानून और नियमों में प्रावधान है।
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