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भारत की GDP वृद्धि से आगे निकला बिहार, राज्य की अर्थव्यवस्था रिकॉर्ड ₹9.9 लाख करोड़ पर पहुँची

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार बिहार की GSDP 2024–25 में ₹9.9 लाख करोड़ पहुँची, वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही और विनिर्माण व निवेश ने अहम भूमिका निभाई।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार बिहार की अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2024–25 में तेज़ रफ्तार पकड़ते हुए राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। त्वरित अनुमानों के मुताबिक, राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) मौजूदा कीमतों पर ₹9,91,997 करोड़ और स्थिर कीमतों (2011–12 आधार वर्ष) पर ₹5,31,372 करोड़ दर्ज किया गया है।

यह वृद्धि मौजूदा कीमतों पर 13.1 प्रतिशत और स्थिर कीमतों पर 8.6 प्रतिशत रही, जो इसी अवधि में भारत की GDP वृद्धि दर क्रमशः 9.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत से अधिक है। यह जानकारी बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी द्वारा तैयार किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के 20वें संस्करण में दी गई है।

सर्वेक्षण में बताया गया है कि बिहार की अर्थव्यवस्था में एक संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से द्वितीयक क्षेत्र यानी विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों में तेज़ी आई है, जिससे समग्र आर्थिक वृद्धि को बल मिला है। इसके साथ ही सार्वजनिक निवेश में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो राज्य के विकास में अहम भूमिका निभा रही है।

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प्रति व्यक्ति GSDP में भी सुधार हुआ है। मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति GSDP वर्ष 2023–24 में ₹66,828 से बढ़कर 2024–25 में ₹76,490 हो गया। वहीं, स्थिर कीमतों पर यह ₹36,333 से बढ़कर ₹40,973 तक पहुँच गया है। यह संकेत देता है कि राज्य में आय स्तर और आर्थिक गतिविधियों में व्यापक सुधार हो रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की वित्तीय स्थिति में भी विस्तार देखा गया है और सरकार का रुझान उपभोग व्यय की तुलना में पूंजीगत निवेश की ओर बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में बिहार की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।

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