बिहार में शराबबंदी के 10 साल: 5.13 करोड़ लीटर शराब जब्त, 17.91 लाख से ज्यादा गिरफ्तार
बिहार में अप्रैल 2016 से जून 2026 तक 5.13 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त हुई और 17.91 लाख से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए। सरकार शराबबंदी वापस लेने से इनकार कर रही है।
बिहार में शराबबंदी लागू हुए करीब एक दशक हो चुका है। इस दौरान राज्य में कानून के तहत बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। आबकारी और पुलिस विभाग के संयुक्त आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2016 से जून 2026 के बीच बिहार में 5.13 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई, जबकि 17.91 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सरकारी उपलब्धि रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में शराबबंदी कानून से जुड़े कुल 11,91,301 मामले दर्ज किए गए। आंकड़े बताते हैं कि शराब के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग ने लगातार अभियान चलाया।
दस वर्षों में कुल 5,13,12,989 लीटर शराब जब्त की गई। इसमें 2,64,32,438 लीटर देसी शराब और 2,48,80,552 लीटर विदेशी शराब शामिल है। इसी अवधि में कुल 17,91,689 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
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हालांकि, इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद राज्य में अवैध शराब की बिक्री और तस्करी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। हाल में वैशाली जिले में 6,132 लीटर विदेशी शराब बरामद होने का मामला भी सामने आया, जो शराबबंदी लागू करने में प्रशासन के सामने मौजूद चुनौती को दिखाता है।
बिहार के मद्यनिषेध मंत्री मदन सहनी ने शराबबंदी खत्म किए जाने की किसी भी संभावना से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी वापस लेने का सवाल ही नहीं है और लोगों को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
मदन सहनी ने यह भी कहा कि सरकार राजस्व जुटाने के दूसरे विकल्प तलाश सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी कंपनी की बनाई शराब अवैध रूप से राज्य में बरामद होती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के गुजरात मॉडल अपनाने के सुझाव पर भी मदन सहनी ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि बिहार में गुजरात मॉडल की जरूरत नहीं है और यहां पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति जारी रहेगी।
राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद यानी एनसीएईआर ने बिहार की आर्थिक वृद्धि को तेज करने के उपायों में शराबबंदी कानून समाप्त करने की सिफारिश की थी। हालांकि, मदन सहनी ने इस सुझाव को मानने से इनकार करते हुए कहा कि सरकार शराबबंदी से मिलने वाले लाभों को जानती है।
इस तरह, बड़े पैमाने पर जब्ती और गिरफ्तारियों के बावजूद बिहार में शराबबंदी को लेकर बहस जारी है। सरकार ने फिलहाल नीति में किसी बदलाव की संभावना से साफ इनकार कर दिया है।
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