पंजाब में बीजेपी-अकाली दल गठबंधन की बातचीत अभी खत्म नहीं, तीन बड़े सवालों पर मंथन
पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की संभावना अभी बनी हुई है। सीट बंटवारे, चुनावी क्षेत्रों और मुख्यमंत्री पद को लेकर बातचीत जारी है।
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के बीच गठबंधन की संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। बीजेपी सार्वजनिक रूप से सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह रही है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है। सीटों की संख्या, किन सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा और मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इन तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का एक दौर हो चुका है। बीजेपी इस बार पहले की तुलना में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। 2017 में गठबंधन के दौरान बीजेपी ने अधिकतम 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में करीब 18.5 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी किसी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी, लेकिन 23 विधानसभा क्षेत्रों में वह सबसे आगे रही। वहीं अकाली दल को करीब 13.4 प्रतिशत वोट मिले और वह केवल नौ विधानसभा क्षेत्रों में आगे रहा। बीजेपी का तर्क है कि उसके प्रदर्शन के आधार पर उसे गठबंधन में ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए।
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सीटों के साथ क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं। परंपरागत रूप से बीजेपी शहरी और हिंदू बहुल इलाकों में तथा अकाली दल ग्रामीण और सिख बहुल क्षेत्रों में चुनाव लड़ता रहा है। इस बार अकाली दल कुछ अर्ध-शहरी सीटों पर दावा कर सकता है, जबकि बीजेपी ग्रामीण पंजाब में विस्तार करना चाहती है।
मुख्यमंत्री पद का सवाल भी अहम है। अकाली दल सुखबीर सिंह बादल को गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा बनाना चाहता है, जबकि बीजेपी इसके पक्ष में उत्साहित नहीं बताई जा रही। यदि गठबंधन बनता है और जीत हासिल करता है, तो अधिक सीटों के आधार पर मुख्यमंत्री पद अकाली दल को और उपमुख्यमंत्री पद बीजेपी को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल दोनों दल गठबंधन की औपचारिक घोषणा में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। बीजेपी ने सभी 117 सीटों पर बूथ स्तर का संगठन मजबूत करना शुरू कर दिया है।
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