×
 

पंजाब चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत? पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव में भाजपा और अकाली दल के छात्र संगठन साथ आए

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र चुनाव में एसओआई ने एबीवीपी उम्मीदवार अंकित बिधान को समर्थन दिया। भाजपा-अकाली दल के छात्र संगठनों का यह गठजोड़ 2027 चुनावों से पहले महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठनों के बीच नजदीकी के संकेत मिले हैं। शिरोमणि अकाली दल की छात्र इकाई स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिधान को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है।

सोमवार को मतदान शुरू होने से कुछ घंटे पहले हुई इस घोषणा को दोनों दलों के बीच संभावित राजनीतिक सहयोग के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा और अकाली दल ने 2020 में केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर अपना लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन समाप्त कर दिया था।

एबीवीपी के मुताबिक, एसओआई ने अपने अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद अंकित बिधान का समर्थन करने का फैसला किया। नामांकन खारिज होने के कारण एसओआई इस वर्ष अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल नहीं हो सकी। दोनों संगठनों के नेताओं ने पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब में एकत्र होकर समर्थन की घोषणा की।

और पढ़ें: अमृतपाल सिंह के गढ़ में बीजेपी की नजर, 2027 चुनाव से पहले ग्रामीण पंजाब के वोट पर बड़ा दांव

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव के लिए सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे मतदान शुरू हुआ। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में मतदान कराया गया। विभागीय प्रतिनिधियों के परिणाम दोपहर 12 बजे से प्रदर्शित किए जाने थे, जबकि पदाधिकारियों के लिए मतगणना और परिणाम की घोषणा जिम्नेजियम हॉल में की जानी थी।

चुनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। तीनों प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोकने के लिए वाहनों तथा आगंतुकों की कड़ी जांच की गई।

एसओआई-एबीवीपी गठजोड़ इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भाजपा के साथ दोबारा गठबंधन की संभावना पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि पंजाब की मौजूदा परिस्थितियों और सामाजिक सौहार्द की जरूरत के कारण दोनों दलों के फिर साथ आने की मांग उठ रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि छात्र राजनीति में शुरू हुआ यह सहयोग क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक राजनीतिक समझ में बदलता है।

और पढ़ें: जीएमएडीए भ्रष्टाचार आरोपों पर अकाली दल का पंजाब सरकार पर हमला, आप सांसद के बयान को बताया सबसे बड़ा कबूलनामा

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share