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बीएमसी में बड़ी जीत के बाद मुंबई मेयर पद के लिए बीजेपी के 5 प्रमुख दावेदार

बीएमसी चुनाव में भाजपा गठबंधन की बड़ी जीत के बाद मुंबई मेयर पद पर सबकी नजर है। महिला आरक्षण के चलते भाजपा की कई नेता दावेदारी की दौड़ में सबसे आगे हैं।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन की शानदार जीत के बाद अब सभी की निगाहें मुंबई के मेयर चुनाव पर टिकी हैं। महाराष्ट्र में पिछले सप्ताह हुए स्थानीय निकाय चुनावों के तहत मुंबई समेत 28 अन्य शहरों में भी मेयर चुने जाएंगे। इनमें से कई नगर निगमों में इस बार महिला मेयर बनने की संभावना है।

मेयर पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी ने कई बड़े नेताओं की गणित बिगाड़ दी है और नए चेहरों के लिए रास्ते खोल दिए हैं। 29 नगर निगमों में मेयर पद के लिए घोषित आरक्षण के अनुसार, 15 नगर निगमों में महिला उम्मीदवार सबसे आगे हैं। मुंबई में मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया है।

बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 227 में से 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिली हैं। गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा (114) पार कर लिया है, लेकिन अब सवाल यह है कि मेयर भाजपा का होगा या शिंदे गुट की शिवसेना का।

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मुंबई में भाजपा की ओर से मेयर पद के लिए जिन पांच नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें रितु तावड़े प्रमुख हैं। 53 वर्षीय रितु तावड़े घाटकोपर (वार्ड 132) से दूसरी बार पार्षद चुनी गई हैं। मराठा समुदाय से आने वाली रितु ने गुजराती बहुल इलाके से जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित की है।

73 वर्षीय अलका केरकर भाजपा की सबसे अनुभवी और निष्ठावान नेताओं में से एक हैं। वे बांद्रा-खार-सांताक्रूज पश्चिम के वार्ड 98 से चौथी बार पार्षद बनी हैं और पहले उपमहापौर भी रह चुकी हैं, जो उनके पक्ष में जाता है।

38 वर्षीय तेजस्वी घोसालकर चुनाव से ठीक पहले शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं। उन्होंने दहिसर से 10,755 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। वे दिवंगत अभिषेक घोसालकर की पत्नी और पूर्व विधायक विनोद घोसालकर की बहू हैं।

इसके अलावा राजश्री शिरवाडकर और शीतल गंभीर के नाम भी भाजपा के भीतर चर्चा में हैं। शिरवाडकर को मजबूत संगठनात्मक कार्यकर्ता माना जाता है, जबकि शीतल गंभीर के पास शीर्ष पद के लिए जरूरी राजनीतिक अनुभव है।

मुंबई के अलावा पुणे, ठाणे और नागपुर नगर निगमों में भी भाजपा और उसके सहयोगियों ने निर्णायक जीत हासिल की है। पुणे और नागपुर में मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है, जबकि ठाणे को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। इन शहरों में भी महिला उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज हो गया है।

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