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हिमाचल सरकार के सतर्कता विभाग को RTI से बाहर करने के फैसले पर भाजपा का हमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को RTI अधिनियम से बाहर किया। भाजपा ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे पारदर्शिता के खिलाफ और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन बताया

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI) के दायरे से बाहर करने के फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है और इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताया है।

दरअसल, 12 मार्च 2026 को कार्मिक विभाग (प्रशासनिक सुधार) ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि राज्य का सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब RTI अधिनियम के प्रावधानों के तहत नहीं आएगा। यह निर्णय RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत लिया गया है, जिसके तहत कुछ सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को सूचना के अधिकार से छूट दी जा सकती है।

इस फैसले के बाद भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पार्टी प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का यह कदम “तानाशाही मानसिकता” को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला आम नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार का उल्लंघन करता है।

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रणधीर शर्मा ने कहा कि RTI अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी को ही RTI से बाहर कर दिया जाएगा, तो जनता को यह जानने का अधिकार नहीं रहेगा कि जांच एजेंसियां कैसे काम कर रही हैं।

भाजपा नेताओं का कहना है कि इस फैसले से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे और इससे पारदर्शिता कम हो सकती है। वहीं राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है और सरकार पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।

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