झारखंड में भाजपा की नई रणनीति: पूर्वी भारत में मजबूत पकड़ बनाने की तैयारी
पश्चिम बंगाल और बिहार में सफलता के बाद भाजपा झारखंड में संगठन मजबूत कर रही है। नए नेतृत्व के साथ पार्टी 2029 चुनावों के लिए रणनीति बना रही है।
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल में मिली जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब झारखंड पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। झारखंड इस समय पूर्वी क्षेत्र का एकमात्र गैर-भाजपा शासित राज्य है, जहां पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए नए नेतृत्व और संगठनात्मक बदलावों पर जोर दे रही है।
पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष और उनकी टीम राज्य में मुद्दों और संदेशों को नए सिरे से तैयार कर रही है। भाजपा नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकते हैं।
झारखंड का गठन वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर हुआ था और उस समय भाजपा ने यहां पहली सरकार बनाई थी। हालांकि, 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार बना ली। इस गठबंधन में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी शामिल हैं।
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इसके बावजूद, भाजपा ने चुनाव में लगभग 33 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया, जो किसी भी एकल पार्टी के मुकाबले अधिक था। वहीं, झामुमो और कांग्रेस को मिलाकर लगभग 39 प्रतिशत वोट मिले।
पार्टी को उम्मीद है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी सफलता से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है, जिसका फायदा भविष्य में झारखंड की राजनीति में मिल सकता है।
हालांकि, झारखंड में अगला विधानसभा चुनाव 2029 में होना है, लेकिन भाजपा अभी से अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी संगठन को सक्रिय करते हुए स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर रही है, ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके और राज्य में फिर से सत्ता हासिल की जा सके।
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