अवैध फेरीवालों पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, पूछा– जिम्मेदारी नहीं निभा रहे अधिकारी तो जनता कहां जाए?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अवैध फेरीवालों पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई और पुलिस से कार्ययोजना मांगी। अदालत ने पूछा कि जिम्मेदारी नहीं निभाने पर नागरिक कहां जाएं।
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई और आसपास के इलाकों में अवैध फेरीवालों के मुद्दे पर राज्य अधिकारियों की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब संबंधित अधिकारी कोर्ट के आदेशों को लागू करने की जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, तो आम नागरिक आखिर कहां जाएं।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय एस गडकरी और कमल आर खाटा की पीठ ने सुनवाई के दौरान की। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से यह भी पूछा कि वे कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 23 मार्च को दिए गए आदेश के बावजूद अवैध फेरीवालों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इनमें कुछ विदेशी नागरिक, विशेषकर बांग्लादेशी मूल के लोगों के शामिल होने की भी बात कही गई है।
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अदालत ने पुलिस से विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें लगातार निगरानी, कार्रवाई और नगर निगम के कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने जैसे कदम शामिल हों।
यह मामला गोरेगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें गोरेगांव पश्चिम रेलवे स्टेशन और आसपास की सड़कों पर अवैध फेरीवालों की समस्या को उजागर किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अवैध फेरीवालों के कारण स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेशों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना पर विचार किया जाएगा।
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