टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के खिलाफ याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में कल सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर 29 अगस्त को सुनवाई करेगा, जिसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य किया गया है। यह याचिका चार ऐप आधारित कैब चालकों की ओर से अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने दायर की है।
याचिका में महाराष्ट्र सरकार की 12 अगस्त 2026 की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि मराठी भाषा की अनिवार्यता से बड़ी संख्या में गैर-मराठी भाषी चालकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है।
याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में परमिट या बैज जारी करने के लिए किसी विशेष भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने और मराठी भाषा के आधार पर चालकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को रोकने की मांग की है।
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हाल के दिनों में महाराष्ट्र के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों ने कई ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा संबंधी नियमों को लेकर नोटिस जारी किए थे। मुंबई महानगरीय क्षेत्र में भी गैर-मराठी भाषी चालकों के बीच इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी और विरोध देखने को मिला।
इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 28 अगस्त को ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को कार्यसाधक मराठी सीखने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान राज्य की आधिकारिक भाषा का आवश्यक ज्ञान नहीं होने पर चालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
फडणवीस के अनुसार, ऑटो और टैक्सी चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हाजी अरफात शेख के नेतृत्व में उनसे मुलाकात की थी। संगठनों ने बुनियादी मराठी सीखने के नियम का समर्थन करते हुए भाषा सीखने की इच्छा जताई है।
अब 29 अगस्त की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अदालत यह तय करेगी कि सरकार की मूल अधिसूचना और उसके तहत उठाए गए कदमों पर क्या रुख अपनाया जाए।
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