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पहलगाम हमले की निंदा से यूएनएससी सुधार तक, एकतरफा शुल्क पर भी बोला ब्रिक्स दिल्ली घोषणा-पत्र

ब्रिक्स दिल्ली घोषणा-पत्र में पहलगाम हमले की निंदा, आतंकवाद पर शून्य सहनशीलता, यूएनएससी सुधार, ग्लोबल साउथ की भागीदारी, एकतरफा शुल्क और प्रतिबंधों के विरोध समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिल्ली घोषणा-पत्र को मंजूरी दी गई। इसमें वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में घोषणा-पत्र जारी होने के बाद कहा कि बदलती दुनिया को पुरानी संस्थाओं के भरोसे नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। मोदी ने कहा कि भविष्य की तकनीकों और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के निर्माण में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।

घोषणा-पत्र में ब्रिक्स देशों ने एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई। देशों ने कहा कि ऐसे कदम व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा दबाव वाले उपायों और प्रतिबंधों का भी विरोध किया।

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पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा

घोषणा-पत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। ब्रिक्स ने आतंकवाद को आपराधिक और अनुचित बताते हुए इसके खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति पर जोर दिया।

घोषणा-पत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता जताई गई। साथ ही कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

यूएनएससी सुधार और अन्य प्रमुख मुद्दे

चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका के समर्थन को दोहराया। अफ्रीकी देशों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को दूर करने की भी मांग की गई।

ब्रिक्स ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और सीमा पार भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आईएमएफ और विश्व बैंक में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी की गई।

इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक शासन, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक संवाद को मजबूत करने पर जोर दिया गया। घोषणा-पत्र में एकतरफा प्रतिबंधों और द्वितीयक प्रतिबंधों को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत बताया गया।

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