ऊर्जा, खाद्य और दुर्लभ खनिजों के जरिए आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा ब्रिक्स
ब्रिक्स ऊर्जा, खाद्य उत्पादन, दुर्लभ खनिजों और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की ताकत से आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है, जिससे प्रतिबंधों, आपूर्ति व्यवधानों और भू-राजनीतिक संकटों का प्रभाव घटेगा।
प्रतिबंधों, शुल्क और व्यापारिक पाबंदियों के कारण वैश्विक कारोबार में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे समय में ब्रिक्स देश अपनी बढ़ती सामूहिक आत्मनिर्भरता का लाभ उठाकर आर्थिक सहयोग मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स नेताओं ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और ऐसे वैकल्पिक व्यापार मार्ग विकसित करने पर जोर दिया है, जो प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक संकटों से कम प्रभावित हों।
ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत रणनीतिक संसाधनों में उसकी हिस्सेदारी है। दुर्लभ खनिजों के मामले में ब्रिक्स देशों के पास दुनिया के करीब 85 प्रतिशत भंडार हैं। वर्ष 2025 के अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडार का 48.9 प्रतिशत, ब्राजील के पास 23.3 प्रतिशत और भारत के पास 7.7 प्रतिशत हिस्सा है। रूस के पास 4.2 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका के पास करीब 1 प्रतिशत भंडार है।
और पढ़ें: मध्य-पूर्व संघर्ष के बीच सरकार ने रिफाइनरियों के लिए एलपीजी उत्पादन लक्ष्य तय किए
ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर और रक्षा प्रणालियों जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भी ब्रिक्स की स्थिति मजबूत है। सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और रूस के पास मिलकर दुनिया के करीब 37.8 प्रतिशत तेल भंडार हैं। कुल मिलाकर ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक प्रमाणित तेल भंडार का लगभग 40.7 प्रतिशत हिस्सा है।
खाद्य उत्पादन में भी समूह का दबदबा है। ब्रिक्स देश दुनिया के करीब 57.4 प्रतिशत खाद्य उत्पादन में योगदान देते हैं। चीन और भारत अकेले लगभग आधे वैश्विक खाद्य उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं। इससे खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और आपूर्ति बाधित होने पर महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापार प्रभावित होने के बाद वैकल्पिक समुद्री मार्गों की जरूरत और बढ़ी है। ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) और रूस के प्रस्तावित पूर्वी एवं आर्कटिक मार्गों जैसे विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं।
हालांकि ब्रिक्स अभी उन्नत सेमीकंडक्टर और अत्याधुनिक तकनीक के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर है, लेकिन ऊर्जा, खाद्य और रणनीतिक खनिजों में उसकी मजबूत स्थिति आर्थिक झटकों और प्रतिबंधों से निपटने की क्षमता बढ़ा रही है।
और पढ़ें: स्वतंत्रता दिवस 2026: विकसित भारत के लक्ष्य के लिए युवा विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर पीएम मोदी का जोर