कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरोपियों की सुरक्षित पेशी के लिए बंगाल सरकार को दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को आरोपियों के सुरक्षित परिवहन के लिए नई गाइडलाइंस बनाने और अंडे फेंकने की घटनाओं पर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि गिरफ्तार आरोपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) तैयार किए जाएं। अदालत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए जिससे आरोपियों पर रास्ते में अंडे या अन्य वस्तुएं फेंकने जैसी घटनाओं को रोका जा सके और उनकी सुरक्षा बनी रहे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपनब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने बुधवार, 1 जुलाई 2026, को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि वर्तमान में आरोपियों के परिवहन को लेकर कौन-कौन से दिशा-निर्देश लागू हैं। अदालत ने सरकार को इन नियमों की जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि आरोपियों पर अंडे फेंकने की घटनाओं में अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी अदालत के समक्ष दाखिल की जाए।
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दरअसल, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के स्थानीय नेताओं, पार्षदों और पूर्व विधायकों पर अदालत या पुलिस हिरासत में ले जाते समय अंडे फेंकने की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता व्यक्त की।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने टिप्पणी की कि केवल एक-दो लोगों की गिरफ्तारी से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। अदालत ने कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ा मुद्दा है। समाज में कानून के प्रति सम्मान और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी के साथ कानून के अनुसार व्यवहार होना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुरूप नई गाइडलाइंस तैयार कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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