सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलर अनिवार्य
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है तथा छोटे स्कूलों के लिए हब-स्पोक काउंसलिंग मॉडल भी लागू किया है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और उन्हें बेहतर करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम नीतिगत सुधार करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों में सामाजिक-भावनात्मक और करियर काउंसलरों की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय देशभर में छात्रों के बीच बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों और करियर से जुड़ी अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इस उद्देश्य से सीबीएसई ने सीबीएसई एफिलिएशन बायलॉज, 2018 के क्लॉज 2.4.12 में संशोधन किया है। यह संशोधन जुलाई 2025 में राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद किया गया, जिसे कोटा स्थित अधिवक्ता सुजीत स्वामी और कुछ मनोविज्ञान विशेषज्ञों ने दाखिल किया था। याचिका में छात्रों में बढ़ते शैक्षणिक तनाव, परीक्षा का दबाव और व्यवस्थित करियर मार्गदर्शन की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था।
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि स्कूलों में योग्य काउंसलरों की अनिवार्य नियुक्ति हो और छात्रों के लिए एक समान व प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य सहायता ढांचा विकसित किया जाए। सीबीएसई के इस फैसले को उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
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इसके अलावा, बोर्ड ने छोटे और संसाधन-सीमित स्कूलों के लिए लचीलापन प्रदान करते हुए काउंसलिंग हब एंड स्पोक स्कूल मॉडल भी पेश किया है। इस मॉडल के तहत बड़े और बेहतर संसाधनों वाले “हब” स्कूल, आसपास के “स्पोक” स्कूलों को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगे। इससे छोटे स्कूलों के छात्रों को भी पेशेवर काउंसलिंग सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा, बल्कि उन्हें अपनी रुचियों और क्षमताओं के अनुरूप करियर चुनने में भी मदद करेगा। सीबीएसई का यह निर्णय स्कूल शिक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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