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CBSE ने कक्षा 9-10 में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया, तीसरी भाषा से बोर्ड परीक्षा छूट

CBSE ने कक्षा 9 से तीन भाषाओं के अध्ययन को अनिवार्य किया। कक्षा 10 में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से छात्रों को छूट दी गई है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 से तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा (R3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

CBSE के इस निर्णय का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषीय कौशल को बढ़ावा देना और उन्हें विविध भाषाई ज्ञान से लैस करना है। इसके तहत छात्र तीन भाषाओं का अध्ययन करेंगे: पहली भाषा (L1), जो आमतौर पर मातृभाषा होती है; दूसरी भाषा (L2), जो राज्य या राष्ट्रीय भाषा हो सकती है; और तीसरी भाषा (L3), जिसे छात्र अपनी पसंद के अनुसार चुन सकते हैं।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा केवल सैद्धांतिक अध्ययन के लिए होगी और इसके लिए कक्षा 10 में कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। यह निर्णय छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करने और भाषा के ज्ञान को प्रोत्साहित करने के लिए लिया गया है।

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इस नीति के तहत शिक्षक और स्कूल प्रशासन छात्रों को तीन भाषाओं की पढ़ाई में मार्गदर्शन करेंगे। CBSE ने कहा कि यह कदम छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और बहुभाषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से भारतीय छात्रों की भाषाई क्षमता और सांस्कृतिक समझ दोनों में सुधार होगा। छात्रों को तीन भाषाओं में दक्षता हासिल करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका शैक्षिक और सामाजिक विकास भी सुनिश्चित होगा।

CBSE की यह नई नीति शिक्षा के क्षेत्र में बहुभाषीय दृष्टिकोण को मजबूत करने और छात्रों को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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