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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में खारिज

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में खारिज हुआ, जिससे वे पद पर बने रहेंगे। विपक्ष ने उन पर पक्षपात और मताधिकार हनन के आरोप लगाए थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों—राज्यसभा और लोकसभा—द्वारा खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब वे अपने पद पर बने रहेंगे और उनके खिलाफ कोई कानूनी जांच या कार्रवाई नहीं होगी। इस प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे, जिनमें 130 लोकसभा और 63 राज्यसभा के सदस्य शामिल थे।

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण व्यवहार, कदाचार, चुनावी धांधली और मताधिकार से वंचित करने जैसे सात गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि इन आरोपों से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

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यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और 124(4) के तहत लाया गया था। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 तथा जज (जांच) अधिनियम, 1968 का भी हवाला दिया गया।

विवाद का मुख्य कारण बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को बताया गया। विपक्ष का आरोप था कि इस प्रक्रिया के कारण कई वैध मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि इससे केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को अप्रत्यक्ष लाभ मिला।

हालांकि, लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।

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