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केंद्र ने चार रिफाइनरियों को 30 हजार टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन क्षमता आवंटित की

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत चार रिफाइनरियों को 30 हजार टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन क्षमता आवंटित की। इससे स्वच्छ ऊर्जा और आयातित ईंधन निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत चार रिफाइनरियों को कुल 30 हजार किलो टन प्रति वर्ष यानी केटीपीए हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की है। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोलियम और रिफाइनिंग क्षेत्र में स्वच्छ हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के साईट यानी ‘स्ट्रैटेजिक इंटरवेंशंस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन’ मोड-2बी योजना के तहत मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार, इससे रिफाइनिंग क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को गति मिलेगी।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड की पानीपत रिफाइनरी को 10 केटीपीए हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है। वहीं, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की बीना रिफाइनरी और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की विशाखापत्तनम रिफाइनरी को पांच-पांच केटीपीए क्षमता दी गई है।

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नुमालीगढ़ रिफाइनरीज लिमिटेड की नुमालीगढ़ रिफाइनरी को 10 केटीपीए क्षमता आवंटित की गई है। इस तरह चारों रिफाइनरियों को मिलाकर कुल क्षमता 30 केटीपीए होगी।

इन परियोजनाओं को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट’ यानी बीओओ व्यवस्था के तहत निजी डेवलपर लागू करेंगे। परियोजनाओं में आवश्यक निवेश भी संबंधित निजी डेवलपर अपनी ओर से करेंगे।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार का मानना है कि देश में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग से आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।

इसके साथ ही यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में मदद करेगी। पेट्रोलियम रिफाइनिंग जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में स्वच्छ हाइड्रोजन के इस्तेमाल से देश के व्यापक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा।

यह जानकारी केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।

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