केंद्र ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए नई पहलें शुरू कीं, एनीमिया मुक्त भारत अभियान को भी मिला नया स्वरूप
केंद्र सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार के लिए नई योजनाएं शुरू कीं। संशोधित एनीमिया मुक्त भारत अभियान, सुमन रोडमैप 2030 और आपातकालीन चिकित्सा दिशा-निर्देश जारी किए गए।
केंद्र सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई नई स्वास्थ्य पहलों की घोषणा की है। सोमवार को आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन में इन योजनाओं का अनावरण किया गया। सरकार ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल तथा एनीमिया नियंत्रण को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया।
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को स्वस्थ नागरिकों के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को देश के समग्र विकास का प्रमुख आधार बताते हुए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
सरकार द्वारा घोषित प्रमुख पहलों में संशोधित एनीमिया मुक्त भारत अभियान, आपातकालीन चिकित्सा परिवहन सेवाओं के लिए नए परिचालन दिशा-निर्देश तथा मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सुमन रोडमैप 2030 शामिल हैं।
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संशोधित एनीमिया मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य महिलाओं, गर्भवती माताओं, किशोरियों और बच्चों में एनीमिया की समस्या को प्रभावी ढंग से कम करना है। वहीं, नए दिशा-निर्देशों के तहत आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक तेज, सुलभ और प्रभावी बनाने की योजना है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
सुमन रोडमैप 2030 के माध्यम से सुरक्षित प्रसव, नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना है।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। सरकार ने कहा कि इन पहलों से देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
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