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विकसित भारत के लिए वित्तीय रणनीतियों पर केंद्र और राज्यों ने किया मंथन

केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों ने विकसित भारत के लिए वित्तीय रणनीतियों पर चर्चा की। सम्मेलन में कृषि, ऊर्जा संक्रमण, निवेश और विकास प्राथमिकताओं के वित्तपोषण पर जोर रहा।

केंद्र और राज्यों ने भारत के दीर्घकालिक विकास एजेंडे के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के तरीकों पर चर्चा की। शनिवार को राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों और वित्त सचिवों का पहला सम्मेलन संपन्न हुआ।

“विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश की विकास प्राथमिकताओं से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री एवं वित्त सचिवों के अलावा अर्थशास्त्री और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल हुए।

सम्मेलन में व्यापक आर्थिक परिदृश्य और देश की विकास योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों पर चर्चा हुई। प्रमुख विषयों में कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए वित्तपोषण और ऊर्जा संक्रमण के लिए धन जुटाने की रणनीति शामिल रही।

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सत्रों के दौरान डॉ. सज्जिद जेड चिनॉय, डॉ. समीरन चक्रवर्ती, प्रोफेसर आशिमा गोयल और डॉ. हर्ष कुमार भानवाला समेत कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। चर्चाओं में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आने वाली वित्तीय चुनौतियों और उपलब्ध अवसरों को समझने पर जोर दिया गया।

सम्मेलन में देश की विकास प्राथमिकताओं के वित्तपोषण के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। केंद्र सरकार ने कहा कि विचार-विमर्श “टीम इंडिया” की भावना के अनुरूप हुआ, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें विकसित भारत के साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम कर रही हैं।

यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ है जब भारत दीर्घकालिक विकास रणनीति के तहत निवेश, बुनियादी ढांचे, कृषि और ऊर्जा प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। बैठक में इन क्षेत्रों के लिए टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

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