महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल को 2016 मुंबई विश्वविद्यालय लाइब्रेरी ठेका मामले में कोर्ट से राहत
मुंबई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र मंत्री छगन भुजबल और अन्य आरोपियों को कालिना केंद्रीय पुस्तकालय निर्माण ठेके से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में आरोपमुक्त कर दिया।
मुंबई की सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल को मुंबई विश्वविद्यालय के कालिना परिसर में केंद्रीय पुस्तकालय के निर्माण ठेके से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में आरोपमुक्त कर दिया है। अदालत ने गुरुवार को भुजबल और मामले के अन्य आरोपियों को भी डिस्चार्ज कर दिया। हालांकि, अदालत के आदेश का विस्तृत रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं हुआ है।
यह मामला उस समय दर्ज किया गया था, जब छगन भुजबल महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जून 2015 में मुंबई विश्वविद्यालय के कालिना परिसर में केंद्रीय पुस्तकालय के निर्माण का ठेका देने में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला दर्ज किया था।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ठेका दिए जाने के संबंध में भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए कुछ भुगतान कथित तौर पर परियोजना से जुड़े लाभों से संबंधित थे। एसीबी ने बाद में मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि, आरोपियों ने एजेंसी के आरोपों से इनकार किया था।
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मामले में भुजबल के अलावा पीडब्ल्यूडी से जुड़े कई सरकारी अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था। इनमें तत्कालीन सब-डिविजनल इंजीनियर गजानन सावंत, कार्यकारी अभियंता हरीश पाटिल, अधीक्षण अभियंता अनिलकुमार गायकवाड़, अवर सचिव संजय सोलंकी और निर्माण विभाग के तत्कालीन सचिव एमएस शाह शामिल थे। अदालत के ताजा आदेश के बाद सभी आरोपी मामले में आरोपमुक्त हो गए हैं।
यह मामला भुजबल के कार्यकाल के दौरान पीडब्ल्यूडी द्वारा दिए गए ठेकों में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच का हिस्सा था। एसीबी ने 2016 में विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया था।
वहीं, कालिना पुस्तकालय परियोजना बाद में रद्द कर दी गई। महाराष्ट्र सरकार ने 2019 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत दिए गए निर्माण ठेके को समाप्त कर दिया था। इसके बाद राज्य ने जमीन वापस ले ली और निजी डेवलपर को मुआवजा दिया।
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