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स्क्रीन के सामने खाना बच्चों के लिए खतरनाक, मोटापा और फैटी लिवर का बढ़ रहा खतरा

स्क्रीन के सामने खाना बच्चों में मोटापा, फैटी लिवर और हार्मोन असंतुलन बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यह आदत भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।

आजकल बच्चों का स्क्रीन के सामने खाना आम हो गया है, लेकिन यह आदत उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। डॉ. मनन वोरा, जो मुंबई के एक ऑर्थोपेडिक सर्जन और हेल्थ एजुकेटर हैं, ने इस बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई है।

डॉ. वोरा के अनुसार, बच्चे अब बिना मोबाइल या टीवी देखे खाना नहीं खा पा रहे हैं, जिससे उनके खाने की आदतें और शरीर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 से 13 साल के बच्चों में मोटापा, फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चे स्क्रीन देखते हुए खाते हैं, तो उनका ध्यान भोजन से हट जाता है और वे बिना सोचे-समझे अधिक खा लेते हैं। इससे उन्हें यह समझ नहीं आता कि कब भूख लगी है और कब पेट भर गया है।

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डॉ. वोरा ने बताया कि स्क्रीन का नीली रोशनी (ब्लू लाइट) शरीर के हार्मोन पर भी असर डालती है। यह मेलाटोनिन को कम करती है और भूख से जुड़े हार्मोन घ्रेलिन और लेप्टिन को प्रभावित करती है। इससे बच्चों को अधिक भूख लगती है और वे ज्यादा मीठा और जंक फूड खाने लगते हैं।

इसके अलावा, स्क्रीन और जंक फूड मिलकर दिमाग में डोपामिन का एक चक्र बनाते हैं, जिससे बच्चों को बार-बार वही आदत दोहराने की इच्छा होती है।

डॉ. वोरा ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों को स्क्रीन के बिना खाना खाने की आदत डालें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे बनने वाली आदत है, जो बच्चों के भविष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर इस आदत को बदलना जरूरी है, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।

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