चीन की आर्थिक विकास दर 4.3% पर सिमटी, सुस्ती से बढ़ी सरकार की चिंता
चीन की अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में केवल 4.3% बढ़ी। रियल एस्टेट संकट, कमजोर मांग और रोजगार चुनौतियों के बीच सरकार पर अर्थव्यवस्था को संभालने का दबाव बढ़ गया है।
चीन की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में केवल 4.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह वर्ष 2022 के बाद सबसे धीमी आर्थिक वृद्धि है। उस समय चीन कोरोना महामारी के प्रभाव से जूझ रहा था। मौजूदा विकास दर सरकार के 4.5 से 5 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से भी कम है, जिससे बीजिंग की चिंताएं बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें सबसे बड़ी समस्या रियल एस्टेट क्षेत्र की लगातार सुस्ती है। कई प्रमुख निर्माण कंपनियां वित्तीय संकट से जूझ रही हैं, जिसके कारण नए निवेश और आवासीय परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
इसके अलावा, देश में घरेलू खपत भी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रही है। लोग खर्च करने के बजाय बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे खुदरा कारोबार और सेवा क्षेत्र पर असर पड़ा है। कमजोर उपभोक्ता मांग का सीधा प्रभाव औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है।
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रोजगार का मोर्चा भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। खासकर युवाओं के बीच रोजगार के अवसर सीमित होने से बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है। इससे उपभोक्ता विश्वास और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो चीन की आर्थिक वृद्धि और धीमी हो सकती है। ऐसे में सरकार पर प्रोत्साहन पैकेज, निवेश बढ़ाने और उपभोक्ता मांग को मजबूत करने के लिए नए कदम उठाने का दबाव बढ़ेगा।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले चीन की धीमी विकास दर का असर वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। अब निवेशकों और उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि चीनी सरकार आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए आगे कौन से नए उपाय करती है।
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