चीन की खामोश ताकत बढ़ाने की रणनीति, एससीओ के जरिए दुनिया में बढ़ा रहा आर्थिक प्रभाव
एससीओ के जरिए चीन आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक प्रभाव बढ़ा रहा है। लेख के अनुसार भारत को चीन की बढ़ती ताकत के बीच अपनी अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और रणनीतिक क्षमता मजबूत करनी होगी।
चीन की सबसे बड़ी ताकत शायद उसकी सेना या विशाल बाजार नहीं, बल्कि ऐसी दुनिया है जो यह देखने में व्यस्त है कि वह चुपचाप क्या बना रहा है। शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ का आगामी सम्मेलन इसी बदलती वैश्विक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
एससीओ में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस और मध्य एशिया के देशों सहित कई सदस्य तथा साझेदार शामिल हैं। इनमें से अधिकांश चीन के पड़ोसी हैं और चीन उनका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लेख के अनुसार, इससे यह संगठन एक बड़े चीनी आर्थिक प्रभाव वाले नेटवर्क में बदलता जा रहा है। कई देश चीनी सैन्य उपकरण भी खरीद रहे हैं।
बिश्केक घोषणा में संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करने, ईरान के प्रति समर्थन, अफगानिस्तान को स्थिर करने और सीमा पार आतंकवाद व मादक पदार्थों की तस्करी रोकने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, लेख में दावा किया गया है कि इन क्षेत्रों में एससीओ का व्यावहारिक प्रभाव अब तक सीमित रहा है।
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एससीओ से जुड़े 28 अन्य समझौतों में संपर्क, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। विश्लेषण के अनुसार, इन परियोजनाओं से चीनी वस्तुओं और कंपनियों की पहुंच दूसरे देशों में और बढ़ सकती है। पाकिस्तान के ग्वादर और कराची बंदरगाह भी इस रणनीति में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
लेख में कहा गया है कि चीन ईरान और रूस से जुड़े संकटों के बीच खुद को अपेक्षाकृत कम आक्रामक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है। साथ ही, वह रूस से ऊर्जा और अन्य संसाधन खरीदता है तथा कई देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करता है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत और अमेरिका यात्रा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित मुलाकात से पहले चीन विभिन्न देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है।
लेख के अनुसार, चीन 74 में से 69 महत्वपूर्ण तकनीकों में अमेरिका से आगे है। ऐसे में भारत के लिए आर्थिक विकास, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, कृषि और तकनीकी क्षमता मजबूत करना बेहद जरूरी होगा।
भारत को रूस के साथ संबंध बनाए रखते हुए चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन तैयार करना होगा। साथ ही, यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को आगे बढ़ाने और एशिया में रूस की आर्थिक भूमिका बहाल करने की कोशिश भी भारत के रणनीतिक हित में हो सकती है।
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