आरक्षण विवाद पर चिराग पासवान का पलटवार, जीतन राम मांझी से मांगा इस्तीफा
आरक्षण नीति की समीक्षा और अनुसूचित जातियों में उप-कोटा तथा क्रीमी लेयर की मांग पर एनडीए में मतभेद उभरे हैं। चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी से इस्तीफा मांगा।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में सहयोगी दलों के दो मंत्रियों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर खुला टकराव सामने आया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शनिवार को अपने सहयोगी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता जीतन राम मांझी से इस्तीफा देने की मांग की। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है और दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
विवाद की शुरुआत इसी सप्ताह हुई, जब जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के भीतर उप-कोटा तय करने का समर्थन किया। बिहार के मंत्री और जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है, ताकि इसका लाभ सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों तक पहुंच सके।
सुमन का कहना था कि उनकी मांग आरक्षण समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसे अधिक न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाने की है। उनका दावा है कि दलित आरक्षण का लाभ कुछ चुनिंदा समुदायों तक सीमित रह गया है, जबकि कई अन्य समुदाय अब भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुसहर समुदाय से अब तक एक भी व्यक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी नहीं बन सका है।
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चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) दोनों बिहार और केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी हैं। मांझी मुसहर समुदाय से आते हैं, जिसे बिहार के अत्यंत पिछड़े दलित समूहों में माना जाता है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में वर्ष 2024 का सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला भी है। शीर्ष अदालत ने राज्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी, ताकि अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े समूहों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाया जा सके।
हाल में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत लोगों को लाभ से बाहर करने की मांग की गई। याचिका में दावा किया गया कि संपन्न परिवार आरक्षण के लाभ पर अधिक नियंत्रण बनाए हुए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि क्रीमी लेयर की अवधारणा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं की जा सकती। वर्तमान में यह सिद्धांत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए लागू है।
चिराग पासवान ने कहा कि यदि मांझी और सुमन अनुसूचित जाति आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा के पक्ष में हैं, तो उन्हें पहले अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर क्रीमी लेयर लागू करने की मांग सामाजिक न्याय के उद्देश्य को कमजोर कर सकती है।
पासवान ने जोर देकर कहा कि अनुसूचित जातियों के सभी समुदाय एकजुट रहे हैं और संविधान आर्थिक आधार पर अनुसूचित जाति आरक्षण निर्धारित करने का प्रावधान नहीं करता। उनके मुताबिक उप-कोटा या क्रीमी लेयर लागू करने से समाज में विभाजन बढ़ सकता है और दलितों के खिलाफ भेदभाव तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई प्रभावित हो सकती है।
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