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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सरकारी और कानूनी सहायता पैनल में 50% महिला प्रतिनिधित्व की वकालत की

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सरकार और कानूनी सहायता पैनलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50% करने की वकालत की, ताकि न्याय प्रणाली में लिंग समानता और समावेशिता बढ़े।

सूर्यकांत ने कहा कि सरकार और कानूनी सहायता पैनलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम से कम 50% होना चाहिए। उन्होंने यह विचार न्यायपालिका के संवैधानिक और सामाजिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए साझा किया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि महिलाओं का समान भागीदारी सुनिश्चित करना केवल न्यायिक प्रणाली को अधिक समावेशी नहीं बनाता, बल्कि समाज में लिंग समानता और न्याय की भावना को भी मजबूत करता है। उन्होंने सरकारी नियुक्तियों और कानूनी सहायता (लीगल ईड) पैनलों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

सूर्यकांत ने यह भी कहा कि महिलाओं के पैनलों में अधिक प्रतिनिधित्व से कानूनी मामलों में विविध दृष्टिकोण आएंगे और न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण बनेगी। उन्होंने सरकारी विभागों और बार काउंसिल से आग्रह किया कि वे अपनी नीतियों और पैनल संरचना में महिलाओं के लिए पर्याप्त अवसर सुनिश्चित करें।

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विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का कदम सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सीधे योगदान देने का अवसर मिलेगा और कानूनी संस्थाओं में उनकी भागीदारी मजबूत होगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने यह भी कहा कि यह पहल केवल सुझाव नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं के लिए एक मॉडल और मार्गदर्शन का काम करेगी। उन्होंने न्याय व्यवस्था में लिंग समानता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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