नई न्यायिक आधारभूत संरचना का विरोध निजी हितों के आधार पर उचित नहीं: सीजेआई
सीजेआई सूर्यकांत ने गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि निजी हित नई न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास का विरोध करने का आधार नहीं हो सकते।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने असम के नॉर्थ गुवाहाटी क्षेत्र में प्रस्तावित नए एकीकृत न्यायिक परिसर को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध पर हैरानी जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नई आधारभूत संरचना के विकास का विरोध व्यक्तिगत या निहित स्वार्थों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
रविवार (11 जनवरी, 2026) को नॉर्थ गुवाहाटी के रंगमहल क्षेत्र में एकीकृत न्यायिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखते हुए सीजेआई ने कहा कि यह परिसर भविष्य की जरूरतों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह एकीकृत न्यायिक परिसर भविष्य की अपेक्षाओं के अनुरूप होगा और आने वाले वर्षों में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाएगा।”
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश की न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि वे इस पेशे में आने वाले नए वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की जरूरतों को पूरा करें। उन्होंने बताया कि जब उन्हें यह जानकारी मिली कि गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इस नए परिसर का विरोध कर रही है, तो उन्हें आश्चर्य हुआ।
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सीजेआई ने कहा, “जो लोग इस नए न्यायिक परिसर का विरोध कर रहे हैं, वे या तो पूरी जानकारी नहीं रखते हैं या फिर बार के नए सदस्यों की आवश्यकताओं को समझ नहीं पा रहे हैं। व्यक्तिगत निहित स्वार्थ भविष्य के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास का विरोध करने का आधार नहीं बन सकते।”
गौरतलब है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर हाईकोर्ट परिसर को स्थानांतरित करने का विरोध कर रही है। वर्तमान में हाईकोर्ट गुवाहाटी शहर के बीचोंबीच स्थित है। बार एसोसिएशन का कहना है कि स्थान परिवर्तन से वकीलों और पक्षकारों को असुविधा हो सकती है।
हालांकि, सीजेआई ने कहा कि नया परिसर रणनीतिक रूप से उपयुक्त स्थान पर बनाया जा रहा है और यहां सभी आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इससे न्यायिक कामकाज अधिक सुचारु और आधुनिक होगा।
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