परिवार में कोई कानून नहीं जानता था… पिता के समर्थन ने मुझे यह राह चुनने को प्रेरित किया: सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई बनने के बाद पहली बार गांव पहुंचे न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि पिता के समर्थन से उन्होंने कानून अपनाया। पेटवार गांव में उनका भव्य स्वागत हुआ और युवाओं को प्रेरक संदेश दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ लेने के बाद अपने पहले दौरे में न्यायमूर्ति सूर्यकांत को उनके पैतृक गांव पेटवार में भव्य और भावनात्मक स्वागत मिला। हरियाणा के इस छोटे से गांव में लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी अपने ‘सूर्या’ को करीब से देखने और सम्मान देने के लिए उमड़ पड़े।
61 वर्षीय राजबीर शास्त्री, जो पास के राखी गढ़ी गांव के निवासी हैं, के लिए यह शनिवार बेहद खास था। उन्होंने बताया कि वह इस दिन का महीनों से इंतजार कर रहे थे। सुबह छह बजे ही वे तैयार हो गए थे, ताकि उस शख्स से मिल सकें, जिसने न सिर्फ उनके गांव बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरित किया है।
अपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने अपने जीवन संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उनके परिवार में पहले कोई भी कानून के क्षेत्र से जुड़ा नहीं था। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार में कानून की कोई पृष्ठभूमि नहीं थी। अगर किसी का सबसे बड़ा योगदान रहा, तो वह मेरे पिता का था, जिन्होंने मुझे इस क्षेत्र को अपनाने के लिए पूरा समर्थन दिया।” उन्होंने कहा कि पिता के विश्वास और प्रोत्साहन ने ही उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत दी।
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने युवाओं को संदेश दिया कि सीमित संसाधन कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बनते। मेहनत, ईमानदारी और धैर्य के साथ कोई भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और अनुशासन ही सफलता की असली कुंजी हैं।
गांववासियों ने पारंपरिक ढंग से उनका स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, फूलों और नारों के बीच माहौल उत्सव जैसा था। स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके गांव का बेटा देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचा है। यह दौरा न केवल एक औपचारिक यात्रा था, बल्कि गांव और देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी बन गया।
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