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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े सीजेपी, अशुतोष रांका ने केंद्र को दी कड़े रुख की चेतावनी

सीजेपी प्रवक्ता अशुतोष रांका ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने केंद्र को कड़े रुख की चेतावनी दी।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशुतोष रांका ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर केंद्र सरकार को कड़े रुख की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो बातचीत का कोई मतलब नहीं रहेगा और संगठन अपनी आगे की रणनीति तय करेगा।

केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक से पहले 25 जुलाई को अशुतोष रांका ने कहा कि अगर सरकार इसी तरह अपना रुख जारी रखती है तो सीजेपी को मजबूर होकर सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेगा।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनटीए) द्वारा 47 अधिकारियों को हटाए जाने के सवाल पर रांका ने कहा कि इस मामले में कई पहलुओं की जांच जरूरी है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के लिए शिक्षा मंत्री को जवाबदेह होना चाहिए और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

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रांका ने बताया कि सीजेपी ने सरकार को अपनी मांगों का एक चार्टर भी सौंपा है, जिसमें परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग शामिल है।

इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि बातचीत करीब दो घंटे तक चली। सीजेपी ने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा सुधारों से जुड़ी पांच सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक करेगी और चर्चा के परिणामों की जानकारी देगी।

केंद्र और सीजेपी के बीच यह तीसरी आधिकारिक बैठक थी। सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि सीजेपी की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

सीजेपी ने पहले सरकार के निमंत्रण पर मंत्री आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार कर दिया था और तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग की थी।

सीजेपी का कहना है कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। संगठन ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।

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