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नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के जंगलों पर जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर, शोधकर्ताओं ने जताई चिंता

जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी घाट के नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में वन पारिस्थितिकी तंत्र अस्थिर हो रहे हैं। शोधकर्ताओं ने अनियमित मौसम और वर्षा से गंभीर प्रभाव की चेतावनी दी।

पश्चिमी घाट के नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के वन पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर पड़ रहा है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बदलते तापमान और अनियमित वर्षा के कारण जंगलों में मौसम का चक्र तेजी से अस्थिर हो रहा है। इससे स्थानीय वनस्पतियों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

इस वर्ष नीलगिरी जिले में बारिश की कमी ने क्षेत्र की जल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, शोधकर्ताओं के मुताबिक कम वर्षा और जल संकट के अलावा जलवायु परिवर्तन का एक कम दिखाई देने वाला लेकिन अधिक गंभीर प्रभाव स्थानीय वनों पर पड़ रहा है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि मौसम के लगातार बदलते स्वरूप के कारण जंगलों में ऋतुओं का क्रम अनिश्चित होता जा रहा है। इससे पेड़ों और अन्य वनस्पतियों के प्राकृतिक विकास चक्र में बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे बदलाव वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

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इस संबंध में ‘मैपिंग फॉरेस्ट फेनोलॉजिकल शिफ्ट इन नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व, वेस्टर्न घाट्स: रिस्पॉन्स टू क्लाइमेट चेंज’ नामक अध्ययन महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाता है। 

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने वर्ष 2000 से 2020 के बीच दो दशकों की अवधि में नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के जंगलों का अध्ययन किया। इसके लिए उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि बदलते तापमान और वर्षा के प्रति जंगलों की प्रतिक्रिया कैसी रही है।

अध्ययन में वनस्पतियों के मौसमी बदलावों पर विशेष ध्यान दिया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, तापमान और बारिश के पैटर्न में बदलाव जंगलों की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहा है।

नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व पश्चिमी घाट का एक महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र है। यहां विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां और वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिकी तंत्र में होने वाले बदलाव भविष्य में जैव विविधता और जल संसाधनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने बदलते मौसम के प्रभावों की लगातार निगरानी और संरक्षण उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।

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