सावन में प्रकृति, जल संरक्षण और सामाजिक सहभागिता का संकल्प लें: सीएम योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावन के अवसर पर प्रदेशवासियों से जल संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जीवन का आवश्यक हिस्सा बताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावन के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के माध्यम से लोगों से प्रकृति से जुड़ने, जल संरक्षण करने और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान और सामूहिकता का पवित्र पर्व है। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमेशा नवसृजन का संदेश देती है और किसानों का परिश्रम हरियाली एवं समृद्धि के रूप में दिखाई देता है। सनातन संस्कृति में प्रकृति के इसी नवाचार को भगवान शिव की आराधना से जोड़कर जीवन में संयम, सेवा और समरसता का मार्ग बताया गया है।
सीएम योगी ने भगवान शिव को प्रकृति चेतना का प्रतीक बताते हुए कहा कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव द्वारा हलाहल विष का पान करना सृष्टि की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग का उदाहरण है। शिव को जल अर्पित करने की परंपरा भी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की जटाओं में बहती गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा और उनके वाहन नंदी प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्येष्ठ और आषाढ़ की गर्मी के बाद जब सावन की बारिश धरती को छूती है तो चारों ओर हरियाली फैल जाती है। नदियां अपने पूर्ण स्वरूप में बहने लगती हैं और मोर का नृत्य प्रकृति के उल्लास का प्रतीक बन जाता है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के बाद सामूहिक श्रम से जुड़े लोगों के सहभोज को साझा संस्कृति का उदाहरण बताया। सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं।
उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी ने आरओ और एयर कंडीशनर से निकलने वाले करीब 50 हजार लीटर पानी को वर्षा जल संचयन प्रणाली से जोड़कर भूजल संरक्षण की प्रेरक पहल की है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से सावन माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का महीना बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर बूंद का सम्मान और हर पौधे का संरक्षण करना ही सावन का वास्तविक संदेश है।
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