बजट से पहले कांग्रेस ने उठाए वित्तीय संघवाद और असमानता के मुद्दे
बजट से पहले कांग्रेस ने वित्तीय संघवाद, धीमे निवेश और बढ़ती असमानता पर चिंता जताई। पार्टी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक समस्याएं केवल आंकड़ों से नहीं सुलझेंगी।
केंद्रीय बजट 2026-27 और आगामी संसद सत्र से पहले कांग्रेस ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। कांग्रेस ने वित्तीय संघवाद के कमजोर होने, निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने और बढ़ती आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था गंभीर संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार (12 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए सरकार को आगाह किया कि मौजूदा आर्थिक समस्याओं का समाधान केवल आंकड़ों के खेल या “सांख्यिकीय भ्रम” के जरिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियादी कमजोरियों को नजरअंदाज कर केवल सकारात्मक आंकड़े पेश करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि राज्यों के अधिकारों और संसाधनों को लगातार सीमित किया जा रहा है, जिससे वित्तीय संघवाद की भावना को नुकसान पहुंच रहा है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा करों के बंटवारे और वित्तीय हस्तांतरण में राज्यों की हिस्सेदारी घट रही है, जिससे उनकी विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
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जयराम रमेश ने यह भी कहा कि आगामी केंद्रीय बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों की झलक साफ तौर पर दिखाई देगी। गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 नवंबर 2025 को सौंपी थी। कांग्रेस का मानना है कि इन सिफारिशों का राज्यों पर गहरा असर पड़ेगा और यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इन्हें किस रूप में लागू करती है।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह वास्तविक आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार करे, निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कदम उठाए और बढ़ती असमानता को कम करने के लिए नीतिगत सुधार करे, ताकि समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
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